Bihar Politics: चिराग पासवान के सामने हाजीपुर वाली चुनौती, चाचा ने एनडीए के साथ समझौते पर खोला राज

Bihar Politics: चिराग पासवान के सामने हाजीपुर वाली चुनौती, चाचा ने एनडीए के साथ समझौते पर खोला राज

Bihar Politics: चिराग पासवान के सामने हाजीपुर वाली चुनौती, चाचा ने एनडीए के साथ समझौते पर खोला राज, लोकसभा चुनाव तो आने वाला है उसी को मद्देनजर रखते हुए हर राजनेता अपनी सीट को सुरक्षित रखना चाहता है जहां से चुनाव लड़ेगा क्योंकि बहुत महत्वपूर्ण हैं कि चुनाव कहां से लड़ा जाना चाहिए और कैसे जीत जितना चाहिए.

अब चिराग पासवान के सामने उनके चाचा पशुपति पारस में चुनौती खड़ी कर दी हैं क्योंकि चाचा ने इंडिया में चिराग की एंट्री को लेकर भी बड़ा दावा किया है बता दे कि चिराग पासवान भले ही अनौपचारिक तरीके से बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए के साथ हैं लेकिन अभी भी उनके सामने चाचा पशुपति पारस की चुनौती बिल्कुल बनी हुई है.

12 साल पहले राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के पशुपति पारस ने कहा कि बिहार के हाजीपुर लोकसभा सीट से 2024 में चुनाव लड़ेंगे दावा किया है. चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित बीजेपी के आलाकमान के साथ.

राष्ट्रीय लोक जनशक्ति चीफ पशुपति पारस ने कहा कि 18 जुलाई को नई दिल्ली में 38 पार्टियों के मीटिंग में मुझसे सहमति लेने के बाद चिराग पासवान को बुलाया गया था पर चिराग पासवान के साथ मैंने समझौता नहीं किया आपने पहले के रूप पर मैं कायम हो मैं किसी भी कीमत पर हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं मुझे कोई ताकत नहीं रोक सकते ऐसा पशुपति पारस ने कहा.

पशुपति पारस ने आगे कहा कि चिराग पासवान औपचारिक तौर पर एनडीए के साथ नहीं जुड़े. साल 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद से चिराग पासवान एनडीए से बाहर है पारस ने यह भी कहा कि मैं बीजेपी का भरोसेमंद साथी हूं कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं कि हाजीपुर स्वीट से मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं मैं 2024 से हाजीपुर सीट से ही चुनाव लड़ लूंगा यह बात लोगों को सुनना चाहिए.

वही पार्टी में विभाजन के बाद चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने कहा कि मेरी पार्टी बरकरार है उसमें कोई विभाजन नहीं हुआ है मेरी पार्टी के सांसद मेरे और एलजीपी के साथ हैं इसके अलावा चिराग पासवान के साथ सांसद वीणा देवी की मुलाकात पर पारस में कहां की हो सकता है कि वह चाय पीने के लिए चिराग पासवान के घर गई हूं क्योंकि राजनीति में उठापटक हमेशा चालू रहती है कौन कहां है कौन कैसे हैं कुछ पता ही नहीं चलता है यानी कि राजनीति ऐसा अखाड़ा है जहां पर सब कुछ संभव होता है.

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